मनोरंजन

आखिरी सांस – -किरण मिश्रा

सबसे बड़ा सवाल अभी भी
क्या उसको इंसाफ मिल पाएगा?
या अंधों के बस्ते में फिर से
इंसाफ दबा दिया जाएगा
उस बच्ची की चीखें सोचकर
मुंह तले कलेजा आया है
खूब मांगी होगी भीख अस्मत की
आखिरी अंत जान गंवाया है
कुछ दरिंदे लोगों ने उसको
खूब नोच-नोच कर खाया है
खिलती कली मसलने वालों
अपनी बेटी कैसे न याद आयी
हैवानों तुम्हें पड़ेंगे कीड़े
बच्ची पर तरस तनिक न आयी
कितना तड़पी होगी वो बच्ची
सोच के खून खौलता हैं
तन मन कुम्हलाया होगा
व्याकुल और लाचारी में
पांच दिनों तक कैसे बिटिया
सांसें अपनी संजोये थी
नफरत है ऐसे दरिंदों से
बार-बार इतिहास दोहराते हैं
शूल सुमन पर गाड़ने वालों
तुम पर अंगारे बरसते हैं
तभी ये ज्वाला शान्त होगी
बत्तीस बंदे फांसी चढ़ाए जाएगे
कड़ी से कड़ी सजा उन्हें मिले
जो अनैतिक कहर बरपाएं हैं
-किरण मिश्रा #निधि# , कानपुर उत्तर प्रदेश

Related posts

तुमने देखा – भूपेन्द्र राघव

newsadmin

मन के भाव – झरना माथुर

newsadmin

ग़ज़ल हिंदी – जसवीर सिंह हलधर

newsadmin

Leave a Comment