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“अषाढ़ – सावन का द्वार” – डॉ अनमोल कुमार

अषाढ़ आया, बादल लेकर,
सावन का द्वार खोल गया।
धरती ने ओढ़ी भीगी चादर,
पेड़ों पर नया पात डोल गया।

किसान के चेहरे पर खुशी,
मेंढक की टर-टर गूंज उठी।
आम की खुशबू, मिट्टी की सोंधी,
मॉनसून की पहली बूंद झूम उठी।

अषाढ़ है बस इशारा,
सावन के गीत का सहारा।
झूले अभी बंधे नहीं,
पर दिल में सावन उतर गया।

– डॉ अनमोल कुमार, मोकामा जिला पटना बिहार

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