मनोरंजन

गर्मी का कहर – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

धक-धक धरती कर रही, गर्मी पड़े प्रचंड।

मानव का  नित तोड़ते, दिनकर रोज घमंड।

भास्कर दें चेतावनी, बदलो अपनी राह,

शुद्ध करो वातावरण, वरना पाओ दंड।।

 

प्रगति हेतु अब मत करो, वृक्षों का संहार।

बंद करो खिलवाड़ सब, बदलो निज व्यवहार।

करो संतुलित अब प्रगति, हरियाली रख ध्यान,

पर्यावरण सहेज लो, वरना सब बेकार।।

 

ऋतुओं के ढँग बदलते, सूखा या अति वृष्टि।

प्रकृति कोप दिखला रही, जहाँ पड़े अब दृष्टि।

ऊपर से आफत करे, सकल प्रदूषण आज,

देती नित चेतावनी, बदला लेगी सृष्टि।।

– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश

Related posts

कहां थमेगी तेजी से बढ़ती हिंसा और अपराध की प्रवृत्ति- नूर संतोखपुरी

newsadmin

भोजपुरी छट गीत – श्याम कुँवर भारती

newsadmin

अनन्या फाउंडेशन का कार्यक्रम हिन्दी भवन सम्पन्न

newsadmin

Leave a Comment