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गाय माँ – अनमोल कुमार

गौ को माता कहकर पूजते हो,
पर भूखी छोड़ सड़क पर क्यों?
दूध पीकर लात मारते हो,
बूढ़ी हो तो कत्लखाने क्यों?

सुनो, गौ माता नहीं है,
गौ “धाता” है, गौ “त्राता” है।
जो गोबर दे वो खेत जिलाए,
जो गौमूत्र दे वो फसल बचाए।

1 लीटर दूध 50 का,
1 किलो गोबर खाद 10 का,
गौमूत्र कीट-नाशक अनमोल,
बछड़ा बैल बने तो हल अनमोल

अगर देशी गाय का गोबर न होता।
रासायनिक जहर से बच नहीं सकते।
ये काली-सफेद डॉक्टर होती।

गौ सम्मान दिवस मनाना है,
तो 3 वचन निभाना है:
दूध पियो, पर गोबर भी उठाओ।
मंदिर में नहीं, खेत में बाँधो।
काटो नहीं, चराओ-पालो।

जिस दिन हर किसान के द्वार पर,
देसी गाय रंभाएगी प्यार से,
उस दिन भारत सोना उगलेगा,
गाय – माँ ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था पर्यावरण और संस्कृति
– अनमोल कुमार, बिहार

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