राष्ट्रीय

कविता – श्याम कुंवर भारती

राष्ट्र निर्माण की नीति बनाओ तो राजनीत करो।

देश के दुश्मनों को कूट चलो तो कूटनीत करो।

 

बाते बड़ी बड़ी तो करते है नेता सभी बढ़ चढ़ कर।

कसौटी पर उतर खरा कर दिखाओ तो राजनीत करो।

 

आपस में विरोध आलोचना जरूरी है  करो चाहे जितना।

विरोध करते राष्ट्र द्रोही न बन जाओ तो राजनीत करो।

 

बात मुद्दे की हो उठाओ जोर शोर से भला हो देश का।

दिशाहीन हो कही भटक न जाओ तो राजनीत करो।

 

छोटे बड़े का लिहाज न करो ये कैसी नेतागिरी है।

राष्ट्रभक्तो शहीदों खातिर सिर झुकाओ तो राजनीत करो।

 

बेवजह दौड़ती सरकार की पटरी उखाड़ना सही नहीं।

देश दुश्मनों का दलाल न बन जाओ तो राजनीत करो।

 

जो पूरा न कर सको वादे जनता से करते ही क्यों हो ।

बन बेईमान पिया सजनी नजर न गिर जाओ तो राजनीत करो।

– श्याम कुंवर भारती, बोकारो,झारखंड, मॉब.9955509286

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