वक़्त
के सफर में,
छोड़ चले सभी कुछ पीछे !
किस्मत
जहाँ चली लेकर,
उसके संग-साथ चले बढ़ते !!
नियति
बहाए चली हमें,
हम रहे जीवन को खोजते !!!
प्रकृति
नाद अनहद सुनते,
कहीं दूर निकलते चले !!!!
हस्ती
अपना वुजूद पहचानते,
स्वयं को चले अनवरत ढूंढते !!!!!
– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान