मनोरंजन

कुछ सुनाओ ना – सुनीता मिश्रा

कहा है मुझे तुमने…

कुछ सुनाओ ना..

क्या सुनना है तुमको?

ये तुम बताओ ना…

मेरे पास क्या है सुनाने को?

सिर्फ तुम ना….

मेरी हर कविता होती है…

प्रारंभ…

शब्दों से तेरे…

हर कविता की सरगम…

तुम हो …

और आलाप तुम हो…

लय भी तुम हो…

तब भी कहते हो…

मुझसे…

कुछ सुनाओ ना…

तुम बोलोगे …

तो शब्द मिलेंगे कहने को …

तब रचुँगी एक नई कविता..

तुम आओ ना पास मेरे…

कुछ सुनाओ ना अपनी…

वे बाते जो अनकही हैं…

तुम आओ ना………

-सुनीता मिश्रा, जमशेदपुर

Related posts

सच मेरा – रश्मि मृदुलिका

newsadmin

पंजाबी साहित्य में डॉ.अमरजीत कौंके एक विलक्षण प्रतिभा – जसप्रीत कौर

newsadmin

हमारे प्रेरक बापू शास्त्रीजी – सुनील गुप्ता

newsadmin

Leave a Comment