बात यह है अब यहाँ, अच्छा नहीं मेरा ठहरना।
समझ लिया मैंने सभी को, कोई नहीं मेरा अपना।।
बात यह है अब यहाँ————————-।।
लुटाये दौलत यहाँ तो, दोस्त बन जाते हैं हजारों।
पूछा नहीं हाल मेरा, मुफलिसी में देख मेरा रहना।।
बात यह है अब यहाँ————————-।।
कहा अपनों ने अपना मुझे, उनकी तारीफ जब तक की।
छोड़ा अकेला अब उन्होंने, देखकर दर्द मेरा सपना।।
बात यह है अब यहाँ————————-।।
मुजरिम करार हुआ हूँ , बिना अदालत और गवाह के।
मुझको नहीं तलाशना है अब, कोई गवाह मेरा अपना।।
बात यह है अब यहाँ————————-।।
करने को है खूं वो मेरा, जिनको दिया है खूं मैंने।
अब सच करना है मुझको, ख्वाब सिर्फ मेरा अपना।।
बात यह है अब यहाँ————————-।।
– गुरुदीन वर्मा.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)