असंभव जिनके शब्दकोष में कभी आया ही नहीं,
छिहत्तरवें में भी जोश उनका घटा ही नहीं।
सिंह-गर्जना सी दहाड़ सुन दुश्मन हो जाते निढाल,
भारत-पथ के प्रदीप, विकास के अनुपम भाल।
जन-जन के नायक, हे कर्मठ प्रधान,
आपसे दमक रहा है मेरा भारत महान।
विनती है मेरी ईश्वर से बारम्बार,
देश को मिलता रहे ऐसा सपूत हर बार।
जन्म-दिवस पर शत-शत वंदन स्वीकारें,
भारत-भू पर आप अमर ज्योति बन उजियारें।
प्रहरी, पथ-प्रदर्शक, अजेय, अपराजेय लाल,
आप हैं देश के गौरव, भारत के अमिट भाल।
जितनी दमकती है गंगा की निर्मल धार,
उतनी ही चमक आपके संकल्पों में अपार।
सूर्य-सा तेजस्वी, हिमालय-सा विशाल,
आपको जन्मदिन पर मेरा प्रणाम हज़ार।
– सविता सिंह मीरा, जमशेदपुर