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किसके लिए बदनाम हुआ मैं – गुरुदीन वर्मा

 

किसके लिए बदनाम हुआ मैं, क्या तू नहीं बदनाम हुई।

किसके लिए बर्बाद हुआ मैं, क्या तू नहीं बदहाल हुई।।

किसके लिए बदनाम हुआ मैं——————।।

 

क्या पाप पैदा हुआ तेरे दिल में, मुझसे हुई जो तू बेवफ़ा।

किससे तुम्हें मिल गया प्यार, मुझसे हुई जो यूँ तू खफ़ा।।

मिलती नहीं मुझसे तेरी निगाह, हालत तेरी यह कैसे हुई।

किसके लिए बदनाम हुआ मैं——————-।।

 

इल्जाम मुझपे ही क्यों लगाया, देखा नहीं क्यों अपना कसूर।

तू क्या पवित्र थी मुझसे पहले, क्यों नहीं गया है तेरा गुरुर।।

सच क्यों छुपाती है तू जग से, तेरी क्यों कहानी ऐसी हुई।

किसके लिए बदनाम हुआ मैं——————।।

 

भूल गई क्या अपनी वफ़ाएँ, तूने मोहब्बत में जो की थी।

तस्वीर मेरे उन खतों की, अपने लहू से जो मैंने रची थी।।

खामोश हूँ क्यों मैं किस वजह से, खामोश तू क्यों ऐसे हुई।

किसके लिए बदनाम हुआ मैं——————-।।

– गुरुदीन वर्मा .आज़ाद

तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)

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