मनोरंजन

नतमस्तक – प्रदीप सहारे 

 

श्मशान में,
वह खड़ा था,
बहुत देर तक,
नतमस्तक होकर।
जले हुए शरीर की,
भस्म के सामने ।
बार-बार निहार रहा था ,
राख से संजोई अस्थियाँ।
पता नहीं कौन किसे,
या किसने जीवन भर ,
दुत्कार ?
या निस्वार्थ प्रेम किया —
प्रश्न अनुत्तरित था।
हाँ, फिर ,
उसकी आँखों से ,
आँसुओं की कुछ ,
बूँदें दिखाई दीं।
पता नहीं क्यों,
मैं भी
नतमस्तक हो गया।

  • प्रदीप सहारे – नागपुर
    मोबाईल -7016700769

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