मनोरंजन

जुल्म धरती पर – श्याम कुंवर भारती

 

जो है आजा यहां कल भी वही रहेगा किसको पता है।

जो है आज जहां कल भी वहां रहेगा किसको पता है।

 

धरती के अंदर और बाहर हो रहा उथल पुथल बहुत।

पाताल और पहाड़ अब कहा रहेगा किसको पता है।

 

हमारी गलतियों का खामियाजा भुगत रही है दुनियां।

बिगड़ा मौसम कहा डूबेगा और बहेगा किसको पता है।

 

लिल रही जमीन पहाड़ नदी नाले और बस्तियां मकान।

ये शैलाब औ सुनामी अब कहा थमेगा किसको पता है।

 

अब भी वक्त है सबको संभलना होगा पर्यावरण बचाना।

बाद उत्तराखंड के किसका नंबर रहेगा  किसको पता है।

 

करना है विकाश भारती पर धरती भी बचाना जरूरी है।

फुटकर ज्वाला मुखी  लावा कहा बहेगा किसको पता है।

– श्याम कुंवर भारती , बोकारो ,झारखंड

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