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जय श्री हरि – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

 

हरि गुण गाते रहें प्रीति भी लगाते रहें,

सच्चे भक्त का सदा ही यही व्यवहार है।

 

ध्रुव-प्रहलाद सम भक्ति करें हरदम

शीश झुके ईश द्वार भक्त की पुकार है।

 

भले कष्ट अनेक हों मगर कर्म नेक हों,

शुभ कर्मों के बल चले सारा संसार है।

 

कष्ट से उबारते भव सागर तारते,

उपकार जगदीश का आप पे उधार है।

– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश

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