मनोरंजन

ये देवघरिया बाबा – श्याम कुंवर भारती

 

बहेला नयनवा झर झर रउवा बानी जटाधरीया,

ये देवघरिया बाबा

भगत बनल बाड़े सब कांवरिया

ये देवघरिया बाबा।

 

चलल नाही जाता पत्थरवा पर गोड धईके।

भारी बा कांवरिया गंगा जलवा खूब भरी के।

दुख दूर करा हाली हमरो चढ़ी बसहा सवरिया,

ये देवघरिया बाबा

भगत बनल बाड़े सब कांवरिया……..।

 

कैलाश के निवासी बाबा बसी ग़ईला देवघर में।

लठिया से मारे ग्वाला रोज साँझे दोपहर में।

शिव लिंग धईले लेके दसमुडी रवनिया

ये देवघरिया बाबा,

भगत बनल बाड़े सब कांवरिया…….।

 

सुल्तानगंज से जल गंगा भरी दौड़ी खाली गोड़ में।

बोल बम के नारा गूंजे कांवरियन सभ मोड में।

अंखिया खोली भोला बाबा ले ली तनी खबरिया,

ये देवघरिया बाबा,

भगत बनल बाड़े सब कांवरिया…….।

 

भईल जब समुदर मंथन सब जहर पी गईली।

जगवा बचाई  नाथ शिव नीलकंठ कहईली।

भगत भारती रउवा चढ़ावे भगती भाव धरिया,

ये देवघरिया बाबा,

भगत बनल बाड़े सब कावरिया,

ये देवघरिया बाबा।

– श्याम कुंवर भारती ( राजभर), बोकारो, झारखंड

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