हे शिवशंकर, हे डमरूधर, विनय हमारी सुनियेगा।
जटाजूटधारी प्रलयंकर, जग को सुखमय करियेगा।
हे नागेश्वर, विश्वनाथ हे, सबके मन में सदा बसें,
महाकाल शरणागत के सिर, वरदहस्त निज धरियेगा।1
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हे गंगाधर साम्बसदाशिव, भक्तों का कल्याण करें।
पग-पग पर नित आने वाले, सारे संकट कष्ट हरें।
नित्य अर्चना पूजा होती, युगों-युगों से सावन में,
जो मन से अभिषेक करें प्रभु, उनके घर भंडार भरें।2
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश