मनोरंजन

ऐसी हो अब क्रांति – गुरुदीन वर्मा

 

होते हैं बलवें फिजूल यहाँ, ऐसी हो अब क्रान्ति।

बन्द हो रक्तपात जमीं पे, सब जगह हो शान्ति।।

शान्ति, सब जगह हो शान्ति/ शान्ति, सब जगह हो शान्ति//

होते हैं बलवें फिजूल यहाँ—————–।।

 

उठ रहा है क्यों धुंआ, हर शहर में यूँ आजकल।

हो रहा है शोर इतना, हर गली क्यों आजकल।।

क्या मुसीबत आ गई, तूफान है हर घर में यहाँ।

क्यों नहीं रोशन है शमां, क्यों है अंधेरा ऐसे यहाँ।।

खत्म हो सारी मुसीबतें, और मिटे हर भ्रांति।

बन्द हो रक्तपात जमीं पे, सब जगह हो शान्ति।।

शान्ति, सब जगह हो शान्ति/ शान्ति, सब जगह हो शान्ति//

होते हैं बलवें फिजूल यहाँ——————-।।

 

हाँ, यहाँ करते हैं पूजा, लोग सदा भगवान की।

हाँ, यहाँ जलती है ज्योति, प्रेम और ज्ञान की।।

क्यों है नफरत फिर दिलों में, धर्म-जाति की बात पर।

बढ़ रहा है पाप यूँ क्यों,बिगड़े हैं रिश्तें किस बात पर।।

समझे हम जज्बात सभी के, रिश्तों में हो सक्रान्ति।

बन्द हो रक्तपात जमीं पे, सब जगह हो शान्ति।।

शान्ति, सब जगह हो शान्ति/शान्ति, सब जगह हो शान्ति//

होते हैं बलवें फिजूल यहाँ—————–।।

– गुरुदीन वर्मा आज़ाद

तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)

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