मनोरंजन

क्या हुआ – दीपक राही

 

क्या हुआ है,

कुछ भी तो

नहीं हुआ।

 

क्या चल रहा है,

कुछ भी तो नहीं

चल रहा हुक्मरानों

के बीच।

 

क्या बदला,

कुछ भी तो

नहीं बदला,

न ही किसी ने

बदलने की

कोशिश की।

 

क्या कहीं कोई

चिंगारी सुलग

रही है,

कहीं भी तो नहीं,

चुल्लहे में जरूर

सुलग रही होगी।

 

क्या होगा,

कुछ भी तो

नहीं होगा,

होनियां गल्लां,

बांता ते बरसातां।

 

क्या होगा,

कुछ न‌ कुछ

होता रहता है,

युद्ध हो रहे हैं और

खत्म हो रहे हैं।

 

तुम क्या चाहते हो,

कुछ भी तो नहीं,

जो आप चाहते हैं

वैसा तो नहीं होगा

ऐसा, तैसा जरूर  होगा।

 

कहां चल दिए,

कहीं भी तो नहीं,

चलना तो अब

आपको है,

इस तरह या

उस तरफ…

– दीपक राही,

आर एस पुरा सेक्टर,

जम्मू (जे एंड के)

Related posts

भोजपुरी पूर्वी लोकगीत – श्याम कुंवर भारती

newsadmin

दीपावली – निहारिका झा

newsadmin

तमसो मा ज्योतिर्गमय – मंतोष कुमार सिंह

newsadmin

Leave a Comment