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शालू – जया भराड़े बड़ोदकर      

                 

neerajtimes.com – शालू गांव से शादी कर के शहर में आ गई है उसके पति ने उसे बताया था कि वो लोग कुछ दिन बाद वो विदेश में चले जाएंगे । वो अब उसी दिन का इंतजार करने लगी। और फिर ससुराल में हर काम खुशी खुशी करने लगी। पर अब वो सोच रही थी वैसा नहीं था क्योंकि अब वो देख रही थी कि उसके पति रात देर तक आने लगे थे। सभी लोग अपने काम से काम रखने लगे थे।कुछ समय तक तो सब ठीक चल ता रहा। अब उसे अपने पति से मिलना मुश्किल होने लगा। धीरे धीरे सब कुछ समझ में आ गया कि यहां उसे पति के अलावा कोई भी इज्ज़त नहीं दे रहा है और वो पति भी अब महज एक काम वाली बाई से ज्यादा कुछ नहीं समझ रहा था। अब उसने अपने पति को सभी लोगों के व्यवहार और उनके खराब आचरण के बारे में बताया । आज उसने ठान लिया था कि वो कुछ भी कर लेगी लेकिन इन लोगों के साथ नहीं रहेगी। पर उसके पति ने उसे कुछ भी नहीं कहा। और जाकर सो गया।तब शालू को सब कुछ समझ में आ गया । उसने हार नही मानी। उसने सुबह पति से कह दिया की वह नौकरी करेगी और अपने जीवन में अपना भविष्य खुद बना सकती हैं । इस तरह वो स्कूल में टीचर बनी फ़िर प्रिंसिपल भी बनी अब दो बच्चों की मां बन चुकी थी। अपने पति को और पूरे परिवार को बिना छोड़े परिस्थिति को संभाल लिया। पति को भी शालू पर बहुत नाज होने लगा था। जो सारा जीवन कष्टों को सहन करके अपनी मंजिल पा ली थी।

– जया भराड़े बड़ोदकर, टाटा सीरी न। टावर १A। ठाणे मुंबई (महाराष्ट्र)

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