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भोजपुरी पूर्वी लोकगीत – श्याम कुंवर भारती

 

बबुआ के जिनगी अब माई बिना प्यार के।

दुनिया में केहू नाही माई बिना दुलार के ।

 

याद करी माई के आंख झर झर बहे पानी।

अंखिया में बुझाला जैसे माई खाड़ देखत बानी।

हमके बुलावे माई हमार नमवा पुकार के।

दुनिया में केहू नाही …………….।

 

नव रे महीनवा माई कोखिया हम रहली।

दुनिया में आई हम माई दुख सब सहली।

गदगद भईली माई हमार मुंहवा निहार के ।

दुनिया में केहू नाही………….।

 

माई के गोदिया हम स्वर्ग सुख खूब पवली।

दुधवा पीआई भूखल माई दिनवा बितवली।

रोई रोई पुकारी माई छोड़ी गईलू संसार के।

दुनिया में केहू नाही………..।

 

गोदिया में तोहरे हम रही भय बिना भीत के।

लुकाइ तोहरे अंचरा पावे बड़ा हम पिरीत के।

अकेला छोड़ी गईलू भारती रोई पुक्का फार के।

दुनिया में केहू नाही माई बिना दुलार के।

– श्याम कुंवर भारती ( राजभर). बोकारो,झारखंड

एक मुक्तक- माई के साथ

धन हई जननी जन्म देई उ रहेली हरदम साथ में।

देवता पितर से बढ़के माई किरीपा बरसेले हाथ में।

दुख उठा के अपने  माई सहेजेली अपने लइका के।

माई के सुख ऊंहे बुझी रहेला माई बिना अनाथ में।

– श्याम कुंवर भारती. बोकारो,झारखंड

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