तेरी चाहतो ने पुकारा बहुत है,
सुना नाम तेरा इशारा बहुत है।
मिला साथ गम का तुम्हारा बहुत है,
हमें आज ये दर्द प्यारा बहुत है।
मिले साथ तेरा मुझे जिंदगी मे,
लगे डूबते को सहारा बहुत है।
सलामत रहे सुत, उमर होवे लम्बी,
बड़े प्यार से माँ ने निहारा बहुत है।
कहाँ याद रखते है मरहूम को अब,
जिन्हे मुफलिसी ने ही मारा बहुत है।
तुम्हीं ने सजाया मेरी जिंदगी को,
नशा प्यार का क्यो उतारा बहुत है।
लुटा दूँ सभी कुछ नही आस बाकी,
दिया गम जो तूने गवारा बहुत है।
– रीता गुलाटी..ऋतंभरा, चण्डीगढ़