मनोरंजन

आज का बचपन – डॉ.सुधाकर आशावादी

हला सा बचपन है न बचपन की रीत
खेल खिलौने भूल गए, भूल गए सब प्रीत ॥

जागरूक मम्मी पापा ध्यान बहुत हैं रखते
आँखों से वो कभी हमें ओझल न होने देते ।

दूध पाउडर में मिला के टॉनिक खूब पिलाएँ
बच्चों की सेहत जाने क्यों अच्छी न रह पाए ।

प्यार से चम्मच भर आहार पौष्टिक खिलाएँ
नहीं खाएँ तो मम्मी पापा मोबाइल दिखलाएँ।

नंगे पैरों इधर उधर वे दौड़ने कभी नही देते
अपना समय भूल गए, बचपन न जीने देते।

कृत्रिमता में जीना मित्रों ये भी कुछ जीना है
बचपन में बचपन न जीएँ फिर कैसा जीना है ? (विनायक फीचर्स)

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