मनोरंजन

मैंने पी है शराब – अशोक यादव

 

हाँ! मैंने पी है शराब, लोग मुझे कहते हैं शराबी।

अपने गम को भूलाता हूँ, इसमें क्या है खराबी?

नाचता हूँ, झूमता हूँ नशे में, खुद से करता हूँ बात।

दिन भर मेहनत करता हूँ, आराम करता हूँ मैं रात।।

जब मैं नहीं पीता हूँ, तब तक मैं मानव रहता हूँ।

मादक पदार्थ पीने के बाद, मैं दानव बन जाता हूँ।।

गुटखा खाता हूँ शान से, सिगरेट पीता हूँ आराम से।

भले ही मुझे कैंसर हो जाए, नहीं डरता अंजाम से।।

नाली में सोया रहता हूँ, कीड़े और सूअर के समान।

गली के कुत्ते मेरे ऊपर पेशाब कर, करते हैं सम्मान।।

पीने के बाद मैं ही गली का दादा, भाई और गुंडा हूँ।

उतरने के बाद कहता हूँ, ऐसा नहीं किया शर्मिंदा हूँ।।

घर में रात-दिन करता हूँ कलह, झगड़े और लड़ाई।

बीवी से माँगता हूँ पैसा, नहीं देती तो करता पिटाई।।

मुझको देखकर डरते हैं, मछली, मुर्गी और बकरे।

बेजुबानों को मार कर खा जाता हूँ, नहीं है लफड़े।।

बन गए मेरे कई साथी, दारू पीता और पिलाता हूँ।

बेंच दिया घर, गहनें, फुटपाथ में जीवन बिताता हूँ।।

बिकती है शराब गली-गली, पीने वालों की कमी नहीं।

चल रहा नशा मुक्ति अभियान, छोड़ो शराब अभी यहीं।।

– अशोक कुमार यादव मुंगेली,छत्तीसगढ़

Related posts

भाई-बहन के प्यार, जुड़ाव और एकजुटता का त्योहार भाई दूज – प्रियंका सौरभ

newsadmin

कारण और निवारण – जया भराडे बडोदकर

newsadmin

सुख,समृद्घि,सौभाग्य दायक है पारद शिवलिंग – महर्षि डॉ.पं.सीताराम त्रिपाठी शास्त्री

newsadmin

Leave a Comment