Uncategorized

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

हाय नजरो को झुका सा देखना,

प्रेम को आँखो मे सिमटा देखना।

 

आज फैला था उजाला प्रीत का,

हर तरफ चाहूँ उजाला देखना।

 

हाय तन्हाई ने मारा आज तो,

जो डराता दिल को साया देखना।

 

प्यार हमसे अब किया है आपने,

दिल नही टूटे हमारा देखना।

 

टीस देती दिल को मेरे आज तो,

आपका मुड़ कर दोबारा देखना।

 

अब चढे है रंग दुनिया के भले,

इश्क तेरा यार चढ़ता देखना।

 

दिल बड़ा तड़पा है बस तेरे लिये,

साथ तेरा बस मिले ऋतु देखना।

– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़

Related posts

आसरा ट्रस्ट, समर्पण, सरफीना एनजीओ के साथ हस्ताक्षरयुक्त करार हुआ आपस में अन्तरित

newsadmin

सचिव, कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग ने जन- चौपाल का आयोजन कर जन समस्याएं सुनी

newsadmin

मुख्य सचिव ने वाइब्रेट विलेज प्रोग्राम, पीएम-जनमन तथा स्मार्ट मीटरिंग के कार्यों की समीक्षा की

newsadmin

Leave a Comment