मनोरंजन

एहसास – ज्योति श्रीवास्तव

सुनो साजन बजे चूड़ी,

तुम्हीं से प्यार करती है।

 

बजे छम-छम पायल,

जो ये झंकार करती है।

 

तुम्हीं को देख के सजन,

सजनी श्रृंगार करती है।

 

मिले सुख-दुख  के पल

फिर भी साथ चलती है।

 

सदा तुम साथ में रहना,

ज्योति इकरार करती है।

– ज्योति अरुण श्रीवास्तव, नोएडा, उत्तर प्रदेश

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