( 1 ) मेरी माँ
रहीं प्रेरणा स्रोत सदा,
जीवनभर हमें यहाँ सिखलाया !
” माँ “,थी अनुभव की अनंत आसमां.,
और जीने का गुर और पाठ पढ़ाया !!
( 2 ) मेरी माँ
दया प्रेम की मूरत,
“माँ”, की ममता थीं अप्रतिम !
जीवन की हरेक विकट परिस्थितियों में….,
सदैव खिलता रहा उनका शुभानन !!
( 3 ) मेरी माँ
लगन धुन की पक्की,
धैर्य संतोष था उनमें अथाह !
मुस्कुराकर मिलती थी सबसे ” माँ “..,
करती न थी कभी कोई चिंता परवाह !!
( 4 ) मेरी माँ
थीं सच्ची एक कर्मयोगिनी,
उत्साह उमंग लगन से सराबोर !
जीवन के हरेक उतार चढ़ाव को देखे ..,
परख चलीं बाँटती खुशियाँ चहुँओर !!
( 5 ) मेरी माँ
रहीं लिपटी प्रेमलता सी,
बांटती चलीं प्रेम स्नेह प्यार !
और रहीं हमेशा यहाँ पे मुस्कुराती…,
चलीं लुटाती सभी पे ममत्व दुलार !!
( 6 ) मेरी माँ
बसी श्वासों में मेरे,
मन अंतस की अटल गहराईयों में !
अहसास करूँ उनकी हर पदआहट का..,
वह बसी हैं मन के कानन उपवन में !!
( 7 ) मेरी माँ
की प्रेममयी मूरत को,
नित करता चलूँ नमन वंदन प्रणाम !
मेरे कानन में खिले सुंदर पुष्पों की महक…,
सदा देतीं चलें माँ के आगमन का पैगाम !!
सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान