मनोरंजन

मेरी कलम से – कमल धमीजा

चलो चलते वहीं हम जानम जहाँ कोई नही होता,

दिलों को जोड़ लेगे फिर गुलो-गुलज़ार के किस्से।

 

इश्क़ औ खुशबू जिसे गुल भी छुपा सकते नही,

यूं समझ लो खिलखिलाता क़हक़हा ऋतुराज है।

 

जो तुम्हारे साथ गुज़री वो उमर अच्छी लगी,

लौटकर आता नही जो वो ज़माना याद है।

 

रब  तुम्हे सदा खुशियों की सौगात दे,

तुम्हारे कदमों में फूलों की बरसात दे।

आँसू ना आये तुम्हारी आँखों में कभी,

जब भी दे वो खुशियों के जज्बात दे।

– कमल धमीजा, फरीदाबाद, हरियाणा

Related posts

गजल — मधु शुक्ला

newsadmin

डा. निधी बोथरा जैन के जन्मदिन पर आराधिका साहित्यिक मंच की काव्य गोष्ठी संपन्न

newsadmin

विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर आभासी कवि सम्मेलन

newsadmin

Leave a Comment