मनोरंजन

जय जगन्नाथ – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

हम वंदन करते झुका माथ।

देते जन जन का सदा साथ।

स्वागत हम करते हो विभोर।

मन में उठती अनुपम हिलोर।

रथ खीँचें सब जन लगा हाथ।1

 

पहले आते श्री बलीराम

दर्शन उनके नयनाभिराम।

वो चलते पग-पग झूम-झूम।

दर्शन देते वह घूम घूम।

भगवन रहते हैं सदा साथ।2

 

भगिनी आतीं पलकों सवार।

दर्शन से भव को करें पार।

भरती हैं जन-जन में उमंग।

स्वागत में बजते हैं मृदंग।

चलतीं भाइन के सदा साथ।3

 

सुन कर जन वंदन बार बार।

निकले प्रभु फिर से एक बार।

बाजें घण्टे अरु शंख, “खोल”।

ध्वनि देती मन के पटल खोल।

तुम दीनन के हो परम नाथ।4

 

दिखते अद्भुत रथ त्रय विशाल।

सज्जा जिनकी अनुपम कमाल।

चलते रुकते मनुहार संग।

लहराते ध्वज रथ पर उतंग।

फहरातीं तीनों ध्वजा साथ।5

 

भरता जन जन में अति उछाह।

बहता श्रद्धा का शुभ प्रवाह।

मौसी गृह सप्ताहिक प्रवास।

गुंडीचा में प्रभु का निवास।

सबके मन बसते कृपानाथ।6

 

पूजन मिलकर सब करें भक्त।

रज चरणों की करती सशक्त।

कैसे दिन  गुजरे और रात।

सुख से ये बीते दिवस सात।

वापस लौटें तब दयानाथ।7

– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश

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