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बरसाने की होली – वैशाली रस्तोगी

वृंदावन,बरसाने में प्रेम रंग में रंगे कृष्ण राधा की जोडी है,
जैसे जग से प्यारे है | बंशी की धुन आईं गोपियाँ देखे जब कृष्णा सबके दुलारे ।
रंग-बिरंगे रंगों से जब सजकर,मोर मुकुट धाये जब शीश पर ।
मन मयूर नाच उठा तब – जब योगी महायोगीशिव भी नाच उठे तब।
उडे गुलाल चारो ओर ।
मयूर मुकुट मन को मोहने वाला है ,कान्हा इसको धारण करने वाला ।
सबके दिल में रहने वाला प्यारा कृष्ण ।
नाचे मयूर वृंदावन में गोपियां गाये गीत हैं ।
मोर पंख से सजा फिर हर बाल ग्वाला मचाये धूम है ।
रास नृत्य की वो छटा निराली ,प्रेम उमंग मन में भरने वाली ।
जो देखे मोर पंख की कला ,मनोकामना उसकी पूरी होने वाली।
सुन्दरता का वो मनमोहक रूप निराला है । जिसके शीश सजा ।
मयूर मुकुट मन भावन,मन भी उसके दर्शन को करने जाये ।
माथुर,वृंदावन छूट जाये भवबंधन कृष्ण -राधा रंग में रंग जाए ।
मथुरा की होली , मन को लुभाए हर जन दिल में घर कर जाए ।
वृंदावन में धूम मची है, खेलेंगे हम होली,लाओ सखियाँ रंग को, लाओ खेलें भर-भर झोली।
रंगों की बरसात में, कृष्ण-राधा जी के साथ होली हम आज।
मोहिनी सूरत कृष्ण की सबके मन को भाए,वृंदावन में धूम मचाए, हाथ ना किसी के आए।
बरसाने की होली बात ही निराली है,किचर से लेकर लठ्ठ मारती नारी है ।
रंग बिरंगे रंग में रंगी दुनियां सारी है |
– वैशाली रस्तोगी, लखनऊ, उत्तर प्रदेश

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