मनोरंजन

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

आँख से देखे बड़े मंजर गये,

ख्याब मे आकर वो रूलाकर गये।.

 

प्यार  मे तेरे  पिया  हम मर गये,

हम जगत की लाज से अब डर गये। .

 

फँस गयी थी आज मैं मझधार मे,

क्या बताएँ किस तरह बचकर गये ।

 

रो रहे थे याद मे तेरे लिये,

भूल बैठे पास से आकर गये।

 

कर्ज मे डूबे रहे किसान भी,

खेत जब उनके हुएँ बंजर गये।

 

जी रहे थे हम भी यादो मे तेरी,

अब तुम्हारे बिन तो जैसे मर गये।

 

प्यार भी समझे नही लैला का *ऋतु,

मार कर मँजनू को वो पत्थर गये।

– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़

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