मनोरंजन

राह तकती कामिनी – सविता सिंह

पूर्णिमा सी चमकती रही चाँदनी,

मीत की बाट जोहती रही कामिनी।

ये मिलन तो विरह में बदलने लगा,

शूल की भांति चुभती रही यामिनी।

 

सुनो प्रियवर जरा मेरा अनुनय विनय,

दीप्त माथे पे तुम हुआ तुमसे प्रणय।

यह महावर अरु चूड़ी निशानी तेरी,

माँग यूँ सजा रहे हो ना कुछ अनय।.

– सविता सिंह मीरा.जमशेदपुर

Related posts

अन्नदाता किसानों को समर्पित डॉ सत्यवान सौरभ की नई किताब ‘खेती किसानी और पशुपालन’ – ऋषि प्रकाश कौशिक

newsadmin

एक कमरा – प्रदीप सहारे

newsadmin

प्रेम-सम्बन्ध से शून्य तक की यात्रा – डॉ. सुरेश नायक

newsadmin

Leave a Comment