मनोरंजनप्रेम – रेखा मित्तलnewsadminFebruary 2, 2026 by newsadminFebruary 2, 20260209 प्रेम कब पूर्ण होता हैं अधूरे ख्वाब ही जीने का सबब देते हैं प्रेम राधा का हो, या मीरा का प्रेम का अंत, पाना नहीं...
मनोरंजनमाँ सरस्वती -सुनील गुप्ताnewsadminFebruary 1, 2026 by newsadminFebruary 1, 20260221 ( 1 )” माँ “, माँ शारदे भगवती वाग्देवी सरस्वती करते हैं नमन वंदन स्तुति ! आपसे मिलती हमको शक्ति…., करें नित बारम्बार आपकी भक्ति...
मनोरंजनसाहिब ! – त्रिशिका धरा,newsadminFebruary 1, 2026 by newsadminFebruary 1, 20260207 साहिब! हम ऋणी तुम्हारे, तुमने राम का मंदिर बना दिया। भगवा-ए-हिन्द किया तुमने, तो हमने कमल खिला दिया। हम पहले ही घायल थे, आरक्षण की...
मनोरंजनपालघर घटना (महाराष्ट्र) – नीलांजना गुप्ताnewsadminFebruary 1, 2026 by newsadminFebruary 1, 20260154 अब भारत का उद्घार नहीं यह भारत के संस्कार नहीं इक वृद्ध निहत्थे साधू पर सौ सौ लठ्ठ प्रहार चले था नीच पापियों का तांडव...
मनोरंजनवसंत – डॉ क्षमा कौशिकnewsadminJanuary 31, 2026 by newsadminJanuary 31, 20260148 घाटी फूलोँ की सजी, विविध रंग के फूल। लगता सुंदर कामिनी, ओढ़े खड़ी दुकूल।। ओढ़े खड़ी दुकूल, सुरंगी पहने सारी। ब्रह्मकमल सिर ताज, छवि लगती...
मनोरंजननव वर्ष – डॉ गीता पांडेयnewsadminJanuary 29, 2026 by newsadminJanuary 29, 20260224 बीत गया पच्चीस है,सन् छब्बीस विराज। एक वर्ष कम जिंदगी,बना रहे सुख साज। शुभ मंगल है कामना, जीवन हो उत्कर्ष, चंदन सोहे भाल पर,सजे शीश...
मनोरंजनकइसे जीहीं रउये बोलीं – अनिरुद्ध कुमारnewsadminJanuary 28, 2026 by newsadminJanuary 28, 20260154 गोता गोती साना सानी, भोरेसे हीं नाचत बानीं। ठंडी लागे कापी डोली, कइसे जीहीं रउये बोलीं? आसन बासन चौका चानी, लीपा पोती गींजी पानी।...
मनोरंजनग़ज़ल (चित्राधारित) – विनोद निराशnewsadminJanuary 28, 2026 by newsadminJanuary 28, 20260156 गर तू बात करे तो मैं भी बात करूँ, गर तू करे इशारा तो मुलाक़ात करूँ। इक बार कदम बढ़ा के देख तो सही,...
मनोरंजनमालवी लोकगीतों को समर्पित व्यक्तित्व हीरा सिंह बोरलिया – मुकेश “कबीर”newsadminJanuary 27, 2026 by newsadminJanuary 27, 20260177 neerajtimes.com- हीरा सिंह बोरलिया एक ऐसा नाम जिन्होंने मालवी लोक गीतों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया और अनजान सी इस विधा को जनमानस में...
मनोरंजनग़ज़ल – रीता गुलाटीnewsadminJanuary 27, 2026 by newsadminJanuary 27, 20260155 खोजी थी नौकरी, हो गुज़र,कुछ नही हुआ, बस जिंंदगी गयी थी बिखर,कुछ नही हुआ। बेरंग हो गयी थी मेरी कि जिंदगी बड़ी, मर कर...