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जय कुष्मांडा देवी – डॉ क्षमा कौशिक

काम्य वर प्रदायिका,सौभाग्य की विधायिका,

ब्रह्मांड की नियोजिका, कुष्मांडा को प्रणाम है।

रुद्ररूप मुंडमाल, चंद्रमुखी नेत्र लाल,

दनुज-दल घातिनी, कुष्मांडा को प्रणाम है।।

मालपुआ लगे भोग, शुभ गति शुभ योग,

ज्ञान शुभ प्रदायिनी, कुष्मांडा को प्रणाम है।

जहाँ माता वास करे, धन के भंडार भरे, दरिद्रता

की नाशिनी, कुष्मांडा को प्रणाम है।।

 

शिव का मनन करे, दानव दलन करे,

रुद्र रूप धार कर, शत्रु को है मारती।

देवता यजन करें, मनुज भजन करें,

करुणा की देवी माता, सबको है तारती।।

शरण में जो भी आये, शुभता से गुण गाये,

मन चाहा वर देती,  प्रेम दया वारती।

सब मिल भाव से, पुण्य के प्रभाव से,

माता के भवन में, करते हैं आरती।।

– डॉ क्षमा कौशिक, देहरादून, उत्तराखंड

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