धन्वंतरि ऋषि का जन्मदिवस, श्रद्धा से सभी मनाते हैं।
घर में धनधान्य रहे हरदम, आभूषण बर्तन लाते हैं।
स्वास्थ्य और खुशियाँ मानव के, जीवन को समृद्ध करें,
हर्ष प्रदाता धन्वंतरि को, श्रद्धा से शीश नवाते हैं।
धनतेरस को धन्वंतरि जी, प्रकटे सागर मंथन से।
आयुष द्वारा मुक्त कराते, रोग-व्यधि के बंधन से।
अमिय कलश सँग लेकर आये, उपकृत हों सब देव-मनुज,
हर घर में धन-धान्य भरा हो, तन-मन सब हों कंचन से।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश