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दादी माँ स्वर्गीय धर्मा देवी की पुण्यतिथि पर चार पुस्तकों का एक साथ लोकार्पण

neerajtimes.com – नफे सिंह योगी मालड़ा सुपुत्र श्री बलबीर सिंह पी टी आई, माता जी श्रीमती विजय देवी जिला महेंद्रगढ़ (हरियाणा), अपनी परंपरा को निरंतर बरकरार रखते हुए एक बार फिर अपनी स्वर्गीय दादी माँ श्रीमती धर्मा देवी की पुण्यतिथि 6 नवंबर के शुभ अवसर पर हिंदी साहित्य की गद्य और पद विधा में रचित, 04 पुस्तकें जिनमें, “सोच का सूरज” (काव्य संग्रह), सन्नाटा (काव्य संग्रह), यादों की यात्रा (संस्मरण संग्रह) है। पुस्तक “सीपी में सागर” का ऐतिहासिक विमोचन 4/10/2026 को द्वितीय राष्ट्रीय जनिका सम्मेलन में हो चुका, जिसका आज पुन: लोकार्पण है,को अपने साहित्यिक गुरु आदरणीय डॉ. मनोज भारत जी के मार्गदर्शन में पूरे परिवार के साथ लोकार्पण समारोह को सफल बनाने का एक बार फिर पुन: सौभाग्य प्राप्त हुआ।
नफे सिंह योगी मालड़ा इसी प्रकार से अपनी दादी माँ की पुण्यतिथि पर अपने सम्पूर्ण परिवार के साथ, हर साल पुस्तकों का लोकार्पण करता है। जिसके पीछे एक बहुत बड़ा रहस्य है। उनका यह मानना है कि स्वर्गीय दादा जी व दादी माँ पूरे परिवार को एक साथ प्रेम भाव और भाईचारे की भावना से ममता के सुत्र से बांधकर रखते थे। इस सुंदर परिवार की बेल को हरा भरा रखने में उनका बहुत बड़ा योगदान था। एक समय ऐसा था जब परिवार में 10 से 12 बच्चे एक साथ खेलते, कूदते और पढ़ते थे, जिसमें पोते, भतीजे -भतीजी, दोहते इत्यादि शामिल थे। दादाजी और दादी जी का एक सपना था कि यह परिवार मिलजुलकर एक साथ प्रेम भाव से अपनी सुप्रसिद्ध पहचान बनाएँ। अपने पूरे परिवार के साथ पुस्तकों का विमोचन करना एक गर्व की बात तो है ही, इसके साथ-साथ बुआ बाला के बड़े बेटे भाई सुधीर उर्फ साहिल का जन्मदिन भी इस महोत्सव को चार चाँद लगा देता है। आज धनतेरस का पर्व भी है तो और भी ज्यादा रौनक का विशेष है।

कवि नफे सिंह योगी मालड़ा बचपन से ही अपनी दादी माँ स्वर्गीय धर्मा देवी के साथ लोकगीत गाने का बड़ा शौकीन था। दादी जी स्वगीर्य धर्मा देवी अपने इलाके की हरियाणवी लोकगीतों की सुप्रसिद्ध गायिका थी। जब भी गांव में कोई प्रोग्राम होता था जैसे कुआं पूजन, होली के गीत, फागण के गीत, सामन के गीत, शादी-ब्याह, छठी,रोट, कड़ाही, गृह प्रवेश एवं मायके से बेटी का ससुराल जाना इत्यादि सभी जमीन से जुड़े हुए गीत उनकी जुबान पर बहुत ही प्रबंधनात्मक योजनाबद्ध व लयबद्ध तरीके से सूसंगठित थे। हरियाणा में किसी भी प्रोग्राम के बाद में गुड़ और बतासे बांटने की एक बहुत पुरानी परंपरा एवं रसम है। बस गुड़ और बतासे पाने के लिए दादी माँ के साथ गीत गाने का शौक पाल लिया नफे सिंह योगी मालड़ा ने, जिसका बुखार आज भी ऊंचाइयों पर है। उनके द्वारा बहुत सारे गीत अपनी दादी माँ के साथ गाये हुए आज भी मिल जाते हैं, यूट्यूब पर।
अपने दादा जी एवं दादी जी से प्रेरणा, माता जी-पिता जी और गुरुजनों के आशीर्वाद के बल पर, परिवारजनों के प्रेम के सहारे तथा शुभचिंतकों की दुआओं से आज नफे सिंह योगी मालड़ा अपने दादा जी व दादी जी के सपनों को साकार करने में निरंतर कार्यरत है। इसके अलावा उनकी बटालियन 11 कमाऊँ का भी इस कार्य के लिए बहुत बड़ा योगदान है जो डबल फर्स्ट परिवार से समय-समय पर मार्गदर्शन मिलता रहता है। उन्होंने अभी तक कुल 35 किताबें लिखी हैं जिनमें एकल संग्रह की 15 पुस्तकें देश की बात (2017), मंजिल से पहले रुकना मत(2018), मौत से मस्ती (2019), कातिल कोरोना (2020), ऐसे कैसे मर जाऊँगा (2021), किसके बिन है कौन अधूरा (2022), सबर किया है सबरी कि ज्यों(2023), बारूद और भावनाएँ (2024), स्मृतियों का सिपाही (2025), जल्दी घर तुम आना बेटा (2025), सूखा समंदर (2025), सोच का सूरज (2026), सन्नाटा (2026), यादों की यात्रा (2026) और सीपी में सागर (2026) है। इसके साथ-साथ प्रकाशित पुस्तकें सांझा संकलन की 20 पुस्तकें लिखी हैं, जिसमें, काव्य संग्रह की 14 पुस्तकें, कहानी संग्रह की 03 पुस्तकें, लघुकथा की संग्रह 02 पुस्तकें और संस्मरण संग्रह की 01 पुस्तक हैं।
इसके अलावा हिंदी साहित्य के पत्र पत्रिकाओं में 25 साल से रचनाओं का निरंतर प्रकाशन व हिंदी साहित्य के सैकड़ो संस्थानों एवं समूहों द्वारा अनेकों बार पुरस्कृत एवं सम्मानित होने का सौभाग्य भी प्राप्त किया है। नफे सिंह योगी मालड़ा अपनी सभी उपलब्धियों का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुवर डॉ मनोज भारत जी, परिवारजन, डबल फर्स्ट फैमिली, शुभचिंतक एवं प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहन देने वाले सभी मित्रगण, सहयोगी एवं रिश्तेदारों को देता है।
इसके साथ-साथ डबल फर्स्ट बटालियन, पी सी विंग परिवार और अपने गाँव की हवा, पानी, धूल एवं मिट्टी को भी शत शत नमन करते हुए आभार व्यक्त करता है, जिन्होंने तन में ताकत, हृदय में हिम्मत और किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण करने का सामर्थ्य प्रदान किया। उनका कहना है कि अगर माँ सरस्वती का आशीर्वाद इसी प्रकार से साथ रहा तो हर साल अपनी दादी माँ और दादा जी की पुण्यतिथि पर इसी प्रकार से पुस्तकों का पूरे परिवार के साथ आजीवन लोकार्पण कर उनकी यादों को सदा जिंदा रखूँगा।
नफे सिंह योगी मालड़ा के स्वर्गीय दादा जी-दादी जी की हार्दिक अभिलाषा थी कि उनका पूरा परिवार सदैव एकजुट रहे और प्रेम, अपनत्व, भाईचारे एवं पारिवारिक संस्कारों की डोर में बँधा रहे। वे चाहते थे कि परिवार के सभी सदस्य सुख-दुःख में एक-दूसरे के सहभागी बनें और पीढ़ियों तक यह पारिवारिक एकता एवं आत्मीयता बनी रहे। उनकी इसी पावन भावना, अधूरे सपने और अमूल्य विरासत को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से उनकी पुण्यतिथि पर प्रतिवर्ष पूरे परिवार के साथ पुस्तकों के लोकार्पण का आयोजन किया जाता है। यह आयोजन केवल साहित्यिक उत्सव ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार को एक सूत्र में पिरोने, पुरखों के संस्कारों को संजोने और उनकी स्मृतियों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखने का एक भावपूर्ण प्रयास है।
आपका अपना अनुकरणीय,
नफे सिंह योगी मालड़ा
महेंद्रगढ़ (हरियाणा)

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