माई बिन मन ना लगे , अंसुवन धार हो बहे।
मईया के बोलवले बलकवा तोर हो अंगनवा,
होई अब पूजाई भवनवा।
मईया के गाई के गीतिया
रोवत बाड़े दुखिया ये मइया।
रथिया सजा दा पुरजोर हो नवरतनवा ।
होई अब पूजाई भवनवा।
चुनरी ओहरवा ओढ़ाईब , सोरहो सिंगरवा चढ़ाइब।
शेरवा गरजे जोर जोर हो मैदनवा
होई अब पूजाई भवनवा।
चमचम चुनरिया चमके मह मह चमेलिया महके।
मईया अईहे भोर भोर हो दर्शनवा
होई अब पूजाई भवनवा।
माई के नजरिया में भारती पुजरिया में,
करिहें माई बलका के ओर छोर हो वरदनवा।
होई अब पूजाई भवनवा।
– श्याम कुंवर भारती (राजभर)*
बोकारो,झारखंड , मॉब .9955509286