( 1 ) बरसात में
छायी है हरियाली..,
आनन लाली !!
( 2 ) मन पपीहा
खूब चहके कूके.,
चले झूमते !!
( 3 ) वन कानन
पर्वत उपवन..,
जीवन खिले !!
( 4 ) पक्षी विहंग
अंबर पे उड़ते..,
किल्लोल करें !!
( 5 ) बहें झरने
कल-कल करते..,
साज बजाते !!
( 6 ) ताल तलैया
नदीयाँ उफान पे..,
खेल रचाएं !!
( 7 ) धानी चुनरी
वसुंधरा ओढ़के..,
चली हर्षाए !!
– सुनील गुप्ता
जयपुर, राजस्थान |