मनोरंजन

शहर के लोग – प्रदीप सहारे

राह में पड़ता हैं शमशान,

रोज गुजरता हूं पास से ।

देखता हूं चिता  के पास,

चिंता में खड़े कुछ लोग ।

कुछ आपस में बात करते ,

कुछ शांत, कुछ फोन पर ।

फिर धीरे धीरे सब जाते,

चिता शांत होने से .पहले ।

हाँ, दो चार लोग दीखते हैं,

चिता के पास मंडराते हुए ।

साधारण से दिखने वाले,

कंधे पर गमछा,या टोपी ।

लगते हैं गाँव से जुड़े रिश्ते ।

दूर हुए हो शहर के अहम में ।

तीसरे दिन भी दिखते वही,

गाँव के साधारण से लोग ।

अस्थियो को सम्हालकर,

राख में से निकालते हुए ।

भावनाओं को दबाकर l

नहीं दिखते आस पास,

शहर के लोग ….

✍ प्रदीप सहारे,नागपुर, महाराष्ट्र

मोबाईल- 7016700769

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