तेरा एतराज –
एतराज तुमको मेरे इश्क बहुत तुमने बताया तो था।
मैं समझ न पाया तुमने फटकार के समझाया तो था।
तेरा दिल तुम जानो मेरा दिल चाहता है तुमको बहुत।
मेरे दिल में तुम हो मेरी आँखों ने सब दिखाया तो था।
मेरा दोष –
सब कुछ था अंदर समाया हुआ पर मालूम न था वो हम ही तो थे।
करने को सब कर सकते थे पर कुछ किया नहीं वो हम ही तो थे।
मंजिल हो पास और हम पा न सके दोष किसका कर्म या भाग्य का।
दोष दूसरों को देते रहे सदा और खुद को देखा नहीं वो हम ही तो थे।
-श्याम कुंवर भारती, बोकारो,झारखंड , माॅब.9955509286