मनोरंजन

हो जाएं मोहन – सुनील गुप्ता

चलें

छोड़ते मोह,

और बन जाएं मोहन !

याद हो आएं मोहे…,

राधे श्याम हरि मोहन !!1!!

 

चलें

बोलते राधे,

मुरली मोहन को साधते !

मुरलिया में खो जाएं…,

धुन रागिनी को बजाते  !!2!!

 

चलें

ओढ़ते पीताम्बर,

कुंज गलियां को छानते !

वृंदावन में मिल जाएं….,

लड्डू गोपाल हमें नाचते !!3!!

 

चलें

फोड़ते मटकी,

दही माखन खाते चुराते  !

कन्हा चलें डांट खाएं….,

हम भागें छिपते-छिपाते !!4!!

 

चलें

चकमा देते,

खूब छकाते नयना मटकाते !

हाथ न श्याम आएं …..,

बनें श्याम, शाम होते-होते  !!5!!

सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान

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