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भेड़ की खाल – डॉ. प्रियंका सौरभ

neerajtimes.com – हर मुस्कुराता चेहरा विश्वास के योग्य नहीं होता। कुछ लोग अपनापन ओढ़कर स्वार्थ, छल और विश्वासघात को अपने भीतर छिपाए रहते हैं। “भेड़ की खाल” एक सशक्त सामाजिक दोहा-गीत है, जो ऐसे ही दोहरे चरित्र वाले लोगों से सावधान रहने का संदेश देता है।
यह रचना बताती है कि जीवन में सच्चे और झूठे लोगों की पहचान संकट के समय होती है। जो लोग केवल स्वार्थ के लिए साथ निभाते हैं, वे अवसर मिलते ही रिश्तों और विश्वास को तोड़ देते हैं। इसके विपरीत, सच्चे संबंध वही हैं जो हर परिस्थिति में साथ खड़े रहें और मन के घावों पर मरहम बनें।
यह गीत विश्वास, रिश्तों, चरित्र और मानवीय मूल्यों पर गहरा चिंतन प्रस्तुत करता है तथा विवेकपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
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✍️ रचनाकार : डॉ. प्रियंका सौरभ

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