मनोरंजन

जगन्नाथ रथ यात्रा – डॉ अनमोल कुमार

गुंडिचा के आंगन को बुलावा आया है,

प्रभु रथ पर सवार होकर घर से आए हैं।

बलभद्र, सुभद्रा संग जगन्नाथ विराजे,

लाखों भक्तों की डोर से रथ खींचे जाए।

 

नगर गूंजे “जय जगन्नाथ” के जयकारों से,

ध्वजा लहराए, शंख बजे चारों ओर से।

ना ऊंच-नीच, ना छोटा-बड़ा कोई भेद,

आज सब बराबर प्रभु के रथ की डोर में।

 

9 दिन का मेला, प्रेम की पहचान है,

जगन्नाथ का रथ, आस्था का जहान है।

जो खींच ले डोर एक बार सच्चे मन से,

उसका जीवन ही प्रभु का वरदान है।

– डॉ अनमोल कुमार, मोकामा जिला पटना बिहार

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