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कैसे आँकें सफलता – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

कैसे आँकें सफलता, क्या उसका परिमाण?
जग करता खुद आकलन, देना नहीं प्रमाण।।

कम करके मत आँकिये, सब हैं कार्य समान।
रख कर छोटे पग तभी, बनता व्यक्ति महान।।

दहशत का फैला तिमिर, हनुमत करिये नाश।
अपने प्रखर प्रताप से, जग में करें प्रकाश।।

अंधकार कुविचार का, बाला करिये दूर।
धरती पर सुख शांति हो, खुशियाँ हों भरपूर।।

बजरंगी का ध्यान धर, शुरू करें निज काम।
जब तक लक्ष्य न प्राप्त हो, नहीं करें विश्राम।।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश

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