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10वीं में अंग्रेज़ी में असफल छात्र बना अंग्रेज़ी शिक्षक, संघर्ष से लिखी सफलता की नई इबारत

neerajtimes,com मुजफ्फरपुर (बिहार)  – कहते हैं कि असफलता अंत नहीं, बल्कि सफलता की शुरुआत होती है। इस कथन को सत्य साबित किया है बिहार के झंझारपुर (मधुबनी) निवासी आर.के. मेहतो ने, जो कभी दसवीं कक्षा में अंग्रेज़ी विषय में असफल हुए थे, लेकिन आज देशभर के हजारों विद्यार्थियों को अंग्रेज़ी पढ़ाकर उनके भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं। 15 अप्रैल 1994 को एक साधारण परिवार में जन्मे आर.के. मेहतो का बचपन आर्थिक अभाव और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच बीता। पिता की गंभीर बीमारी के कारण मात्र 13–14 वर्ष की आयु में ही उन्हें परिवार की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। घर चलाने के लिए उन्होंने बैग की मरम्मत, टायर पंचर बनाना, फैक्ट्री और बिजली की दुकान सहित कई छोटे-बड़े कार्य किए। आर्थिक तंगी इतनी थी कि कई बार पुराने और फटे कपड़ों में ही काम करना पड़ता था।

लगातार संघर्ष और काम के कारण पढ़ाई प्रभावित हुई और वे दसवीं कक्षा में अंग्रेज़ी विषय में असफल हो गए। समाज के तानों और उपहास के बीच उन्होंने हार मानने के बजाय यह संकल्प लिया कि एक दिन उसी अंग्रेज़ी विषय में अपनी अलग पहचान बनाएंगे। जीवन का निर्णायक मोड़ तब आया जब एक दिन कूलर ठीक करने के दौरान उनकी मुलाकात एक शिक्षक से हुई। शिक्षक के शब्द— “सिर्फ एक कागज़ का टुकड़ा तुम्हारा भविष्य तय नहीं कर सकता”— ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की और कठिन संघर्षों के बाद 11वीं कक्षा में प्रवेश लिया। इसी दौरान छोटे बच्चों को पढ़ाने का अवसर मिला, जिसने उनके भीतर शिक्षक बनने का सपना जगा दिया।

स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज (ईवनिंग) से हिंदी ऑनर्स की पढ़ाई की। इस दौरान वे सुबह बच्चों को पढ़ाते, दिन में कॉलेज जाते, शाम को ट्यूशन लेते और देर रात तक स्वयं अंग्रेज़ी का अध्ययन करते रहे। जिस विषय में कभी असफल हुए थे, उसी विषय को उन्होंने अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। आज आर.के. मेहतो दिल्ली के संत नगर, बुराड़ी में रहकर “Rojgar with Ankit” शैक्षणिक मंच पर अंग्रेज़ी विषय के शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। वे पिछले 12 वर्षों से विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करा रहे हैं और अपने अनुशासन, मेहनत तथा प्रभावी शिक्षण शैली के कारण हजारों विद्यार्थियों के बीच लोकप्रिय हैं।

उनके पढ़ाए अनेक विद्यार्थी आज विभिन्न सरकारी एवं निजी संस्थानों में सफल होकर उन्हें अपनी सफलता का श्रेय देते हैं। आर.के. मेहतो का जीवन इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि दृढ़ निश्चय, कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी व्यक्ति अपनी कमजोरियों को अपनी सबसे बड़ी शक्ति में बदल सकता है। आर.के. मेहतो की संघर्षगाथा आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो असफलताओं से निराश हो जाते हैं। उनका जीवन संदेश देता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर, तो सफलता एक दिन अवश्य कदम चूमती है।

रिपोर्ट – कुमार संदीप, मुजफ्फरपुर (बिहार)

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