माँ
है मेरी दुनिया,
अरमानों की, खिलती बगिया !!1!!
माँ
है अनंत आसमां,
चले झूमें, मेरा जहाँ !!2!!
माँ
है प्रथम गुरु,
हों निर्विघ्न, कार्य शुरू !!3!!
माँ
है मेरी आदर्श,
चलूँ बढ़ता, छूता अर्श !!4!!
माँ
है जीवन पर्याय,
ईश्वरीय उपहार, अप्रतिम अपरिहार्य !!5!!
– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान