मनोरंजन

सिंदूरी स्वप्न – सविता सिंह

पलकों में जो छुपा हुआ था,

वह पैगाम सुनहरा है।

आज खुला है राज हृदय का,

रंग यह बेहद गहरा है।

अधरों का वह मौन समर्पण,

आज विवश होकर बोला

चुपके से सदियों का सावन,

इस सूने आँगन डोला।

माँग सजी जब लाल रेखा से,

मन का दर्पण मुसकाया।

जिसको केवल चाहा दिल ने,

उसको अपने सम्मुख पाया।

-सविता सिंह मीरा ,जमशेदपुर

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