मनोरंजन

रोला छंद – सुधीर श्रीवास्तव

अपने मन के भाव, सदा  ही  उत्तम  राखो।

जो भी मिले प्रसाद, प्रेम से उसको चाखो।।

बच्चे  हैं  नादान,   आप  इसको  स्वीकारो।

दीजै उनको प्यार,  नहीं  उनको  दुत्कारो।।

 

बोल रहे जो आप, तनिक तो आप विचारो।

है  कुंठा  सैलाब,  आप  भी  ताना  मारो।।

नहीं सही ये कर्म,  आप  जो  करते  प्यारे।

उत्तम समझो धर्म,   सभी के बनो दुलारे।।

 

जिनके कारण आज,  आप दुश्मन बन जाते।

रख लो थोड़ा धैर्य,  आज क्यों हो पछताते।।

इतना  भी  उत्साह,  नहीं  होता  है  प्यारा।

कल रोकर क्या आप , किसी  का बनें सहारा।।

 

इतने उत्सुक आज, सोच  कर  बदला  लोगे।

क्या सोचा है मित्र, भला क्या खुद को दोगे।।

कर लो आप विचार, अभी ये हितकर होगा।

जाकर मिल लें यार, जिसे उन सबने भोगा।।

 

चलो  गाँव  की  ओर, आज  नगरी  को  छोड़ो।

मानो  मेरी  बात,   दिशा  अपनी  तो  मोड़ो।।

निकल गया यदि वक्त, भला फिर क्या पायेगा।

सिर  पर  रखकर  हाथ, सिर्फ तू  पछताएगा।।

 

चलो न ऐसी राह, जहाँ तुम भटक न जाओ।

जिद से क्या है लाभ, आप कल को पछताओ।।

सोच समझकर मित्र, कदम तब आप निकालो।

कौन रहा कह आज, बला खुद पास बुला लो।।

 

आया गर्मी मास,  सूर्य का आतप फैला।

लोग हुए बेजार,   हुआ आतंकी  खेला।।

सावधान हों आप, खेल जो मौसम खेले।

दोष नहीं वैशाख,  चक्र मौसम के मेले।।

 

जान रहे  हैं  आप, सूर्य  की अपनी लीला।

गर्मी का आतप, कहीं कुछ बचा न गीला।।

कुछ मत कहिए ताप,  करो अपनी तैयारी।

बचकर रहिए आप, पड़े  वैशाख  न भारी।।

 

आया संकट आज, सामने  सारी  दुनिया।

मुश्किल का है दौर, रही रो मेरी  मुनिया।।

समझ लीजिए आप, घड़ी मुश्किल ये आई।

दुनिया में कुछ लोग कहें  हम मुन्ना भाई।।

 

खट्टे  हैं  अंगूर, मान  मत तुम  घबराना।

बनो नहीं लंगूर, आप पथ  छोड़  न जाना।

कोशिश करिए आप, पास में मंजिल होगी।

तब  मीठे  अंगूर,  भला  कहलाना  रोगी।।

 

सुखदाता हैं राम, सभी हैं नित गुण गाते।

भवसागर  से  पार, हमें प्रभु राम कराते।

करते जाते काम, मनुज के कष्ट मिटाते।

दुनिया भर में राम, हृदय से  पूजे जाते।।

 

हमको इतनी आस, किसी से करनी होगी।

जन-मन पर विश्वास, नहीं हो कोई ढोंगी ।।

अपने भी अब खेल, बने  नाहक ही रोगी।।

यह जीवन की रेल, कहो बन जायें जोगी।।

 

खड़े हाथ पकड़कर, जिसे है नहीं पुकारा।

वही  निभाते  साथ, जिसे  हमने  दुत्कारा।

नाहक था बेचैन, छोड़  पथ  साथ  हमारा।

कल का दुश्मन आज, हमें है सबसे प्यारा।।

-सुधीर श्रीवास्तव,गोण्डा, उत्तर प्रदेश

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