मनोरंजन

गजल – ऋतु गुलाटी

हँसीं  होठ जब मुस्कुराने लगेगे।

कहानी ये दिल की सुनाने लगेगे।

 

खिला दिल अभी से मचलने लगा है।

मिलेगे  सजन  गुनगुनाने  लगेगे।

 

न छेड़ो गजल को अभी रात बाकी।

जुटी है भीड़ महफिल सजाने लगेगे।

 

लबो  पे खुशी  के तराने तो छेड़ो।

मिलेगे  सभी  गीत गाने  लगेगे।

 

गजल के सुरताल को रोकना* ऋतु*

सभी  गीत को  आजमाने  लगेगे।

– ऋतु गुलाटी ऋतंभरा,..चंडीगढ़

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