मनोरंजन

जिंदगी का सफर- राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

जिंदगी का सफर एक अनजानी राह है,

कभी धूप संग, कभी छांव की चाह है।

हर मोड़ पर कुछ नया सिखाती है,

कभी हंसाती तो कभी रुलाती है।

कदम बढ़ते हैं तो मंजिल भी मिलती है,

रुकने से बस दूरी ही बढ़ती है।

आस के दीप जलाए रखना सदा,

अंधेरों में भी रोशनी खिलती है।

बीते लम्हों का बोझ मत उठाना,

आने वाले कल को गले लगाना।

हर गिरावट में छिपा एक सबक है,

खुद को हर बार फिर से उठाना।

रिश्तों की गर्मी से राह सजती है,

मुस्कानों से दुनिया महकती है।

सपनों को सच करने की चाह रखो,

मेहनत से हर किस्मत बदलती है।

जिंदगी एक कहानी अधूरी सी,

हर पल में छिपी है खुशी पूरी सी।

चलते रहो बस बिना थके तुम,

यही सफर है, यही मंजिल जरूरी सी।

– राजलक्ष्मी श्रीवास्तव,जगदलपुर राजिम, छत्तीसगढ़

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