मनोरंजन

गीतांश –  मणि अग्रवाल

तुम जीवन गीत बनो साजन,

मधुघट मधुरस छलकाएगा।

फिर प्राची माँग सजाएगी,

अँधियारा अलक सजाएगा।।

यौवन की कच्ची ड्योढ़ी पर,

तानों की हैं बंदनवारें।

लज्जा, घबराहट, समझौते,

श्रमरत हैं,  आश्वासन  हारें।

स्वीकृति का आलिंगन पा कर-

पतझार, पलाश खिलाएगा।

तुम जीवन गीत बनो साजन,

मधुघट मधुरस छलकाएगा।।….

-मणि अग्रवाल”मणिका”, देहरादून उत्तराखंड

Related posts

नन्हा पेड़ – डॉ. सत्यवान सौरभ

newsadmin

मौन जीतता हैं – रेखा मित्तल

newsadmin

मां गंगा से महाकुंभ प्रयागराज में हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की प्रार्थना की – कवि संगम त्रिपाठी

newsadmin

Leave a Comment