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भोजपुरी धमाल होली – श्याम कुंवर भारती

नेहिया टूटी धागा दुई भागा।

मोर सइयां सुहागा घरे आजा।

 

देखी देखी देहिया नेहियां  जगावे।

सइयां बेदर्दी के सूरतिया सतावे।

फागुन के दिनवा सुहावन लागा ।

मोर सइयां सुहागा……..।

 

जब जब बहे वैरी पवनवा ।

पोर पोर टूटे नाजुक बदनवा।

पिया मिलन के भाव जागा।

मोर सइयां सुहागा…….।

 

महुआ कोचाइल आम मोजराइल ।

सरसों फ़ुलाइल मटर गदराइल ।

पगलाइल कोईलिया गावे रागा,

मोर सइयाँ सुहागा……..।

 

बगिया में फुलवा मह मह महके।

मांतल यौवनवा रही रही बहके।

रसिक भंवरवा यौवन रस ले भागा।

मोर सइयां सुहागा…….।

 

रंगब रंग गुलाल होई गाल लाल।

भिन्जी अंचरा होई होली धमाल ।

पिया अईहें मुंडरिया बोले कागा।

मोर सइयां सुहागा घरे आजा।

– श्याम कुंवर भारती ( राजभर)

बोकारो, झारखंड, मॉब.9955509286

 

 

 

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